Sunday, April 10, 2011

अन्ना हज़ार हैं......


मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल की ओर लोग आते गए और कारवां बनता गया..अगर कोई इंसान कुछ करने की सोच ले तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता, और जिस काम का मकसद साफ़ हो,नियत में कोई खोट न हो तो वहाँ तो इश्वर भी खुद साथ देता है,अन्ना हजारे ने सरकार के खिलाफ लोकपाल बिल को लेकर अनशन करने की जो पहल की वो ये सोच कर नहीं की थी की उन्हें पता था की, बस वो शुरुआत करेंगे और लोग उनके साथ होते जायेंगे,बल्कि शायद उन के दिमाग में ये बात होगी की जुल्म सहना भी जुल्म का साथ देना होता है, शायद मिस्र में भी यही हुआ था वहाँ लोग सत्ताधारी होसने मुबारक की ज्याद्त्तियों से तंग आ गए थे, सत्ता परिवर्तन चाहते थे,वही हुआ जो अवाम ने चाहा, आवाम अगर एक हो जाये तो हुक्मरान को झुकना ही पढता है...मिस्र में सरकार तानाशाही थी जब की हमारे यहाँ लोकतंत्र, हमारे द्वारा चुने जाने वाले नेता ये भूल जाते हैं की उनका असल काम क्या है और बस कुर्सी पर बैठते ही भरष्टता का पाठ पढ़ना शुरू कर देते हैं...लेकिन कभी ये सोचा किसी ने की इनको भ्रष्ट कौन बनाता है? कौन है जिम्मेदार? भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी लोकपाल बिल लाने की मांग को लेकर अन्ना ने ५ अप्रैल को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन शुरू किया था, और केवल ९८ घंटों में सरकार ने अधिसूचना भी जारी कर दी,अन्ना की सारी मांगों को मान लिया गया,इस से ये तो बात साफ़ हो गयी की हमारे यहाँ वाकई लोकतंत्र की सरकार है,ये बात अलग है की सरकार में शामिल कुछ भ्रष्ट नेताओं ने सरकार की छवि को धूमिल कर दिया है,आज हम दूसरे देशों की तारीफ करते हैं वहाँ की हर चीज़ हमें अच्छी लगती है,वहाँ का रहन सहन, खाना, पहनावा, और सबसे ज्यादा सिक्यूरिटी ..हमरे देश में क्या कमी है..१२२ करोड की जनसंख्या वाला देश है हमारा चाहें तो विश्व का नक्शा बदल सकते हैं...ब्रेन की कमी नहीं, मेहनतकशों की कमी नहीं, प्राक्रतिक संसाधनों की कमी नहीं,लेकिन कमी है तो खुद में सुधर की जिस के लिए किसी को सड़कों पर उतरने की ज़रूरत नहीं, किसी अनशन की ज़रूरत नहीं बस अपने ज़मीर को सवारने की ज़रूरत है...

हर वो हिन्दुतानी जो अपनी रोज की कमाई २५% से ३०% की करता है..ज़रूरत के हिसाब से सिर्फ ५% कम करले..जिससे उसको भी नुक्सान न हो और उसके दूसरे हिन्दुस्तानी भाई पर बोझ भी न पड़े...हर भारतवासी अगर अपने काम को सच्चाई और इमानदारी से करे तो हमें किसी दूसरे की ज़रूरत नहीं ,ऐसे कई उदहारण हैं जिन्हें लिखना संभव नहीं लेकिन हर भारतवासी खूब जनता है...की हर दिल में एक नहीं अन्ना हज़ार हैं सिर्फ उसे जगाने की ज़रूरत है... जय हिंद !!!

No comments:

Post a Comment